CURRENT-AFFAIRS

Read Current Affairs


संदर्भ

भारत रत्न के बाद, पद्म पुरस्कार देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान हैं। इनकी स्थापना 1954 में की गई थी। प्रारंभ में इन्हें 'पहला वर्ग', 'दूसरा वर्ग' और 'तीसरा वर्ग' कहा जाता था, जिसे बाद में 1955 में बदलकर क्रमशः पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री कर दिया गया। 1954 से लेकर आज तक (1978-79 और 1993-97 के संक्षिप्त अंतराल को छोड़कर), ये पुरस्कार प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किए जाते हैं। यह सम्मान किसी भी जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना 'विशिष्ट कार्यों' को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है।

पद्म पुरस्कार क्या हैं?

पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं:

  • पद्म विभूषण: 'असाधारण और विशिष्ट सेवा' के लिए (यह दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है)
  • पद्म भूषण: 'उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा' के लिए।
  • पद्म श्री: किसी भी क्षेत्र में 'विशिष्ट सेवा' के लिए। ये पुरस्कार कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल और नागरिक सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाते हैं।

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस वर्ष कुल 131 व्यक्तियों को इन सम्मानों से नवाजेंगी।
  • इस वर्ष की सूची में कला जगत के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र, क्रिकेट जगत के नायक रोहित शर्मा, अभिनेता आर. माधवन और मलयालम सुपरस्टार ममूटी जैसे नाम शामिल होने के कारण यह विषय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

इन पुरस्कारों का महत्त्व

ये पुरस्कार केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में उनके निस्वार्थ योगदान का प्रतीक हैं। इनका महत्त्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • यह 'अनसंग हीरोज' (अनाम नायकों) को पहचान दिलाता है।
  • समाज में उत्कृष्टता और नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करता है।
  • यह राष्ट्रीय एकता और सेवा भाव को सुदृढ़ करता है।

पुरस्कार के स्वरूप

पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ता को निम्नलिखित वस्तुएं प्राप्त होती हैं:

  • राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मुहर वाला एक सनद (प्रमाणपत्र)
  • एक पदक जिसे विशिष्ट आयोजनों में पहनने की अनुमति होती है।
  • पुरस्कार के साथ कोई नकद राशि, भत्ता या रेल/हवाई यात्रा में छूट जैसी वित्तीय सुविधाएं नहीं दी जाती हैं।

संवैधानिक प्रावधान

  • भारत के संविधान के अनुसार, ये पुरस्कार राज्य द्वारा दिए जाने वाले सम्मान हैं। इन्हें अनुच्छेद 18(1) के तहत 'उपाधि' नहीं माना जाता।
  • संविधान की सातवीं अनुसूची और सरकार के कार्य संचालन नियमों के तहत, गृह मंत्रालय इन पुरस्कारों का समन्वय करता है।
  • पद्म पुरस्कार समिति का गठन प्रतिवर्ष प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है।

पुरस्कार एवं अनुच्छेद 18 विवाद

संविधान का अनुच्छेद 18 'उपाधियों के अंत' की बात करता है। आलोचकों का तर्क था कि ये पुरस्कार लोकतांत्रिक समानता के विरुद्ध हैं और एक नया 'कुलीन वर्ग' पैदा करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: बालाजी राघवन बनाम भारत संघ (1996) के ऐतिहासिक मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • पद्म पुरस्कार 'उपाधि' नहीं बल्कि 'सम्मान' हैं।
  • ये अनुच्छेद 18 का उल्लंघन नहीं करते क्योंकि इनका उपयोग नाम के आगे या पीछे उपसर्ग/प्रत्यय के रूप में नहीं किया जा सकता।
  • यदि कोई व्यक्ति इनका उपयोग अपने नाम के साथ करता है, तो उससे यह सम्मान वापस लिया जा सकता है। अतः, यह समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है बल्कि 'योग्यता' (Merit) का सम्मान है।

वर्ष 2026 का सांख्यिकीय विवरण

वर्ष 2026 में कुल 131 पुरस्कारों की घोषणा की गई है:

  • पद्म विभूषण: 05
  • पद्म भूषण: 13
  • पद्म श्री: 113

राज्यवार वितरण

इस वर्ष भौगोलिक वितरण में विविधता देखी गई है:

  • सर्वाधिक विजेता: महाराष्ट्र (15) राज्य प्रथम स्थान पर है।
  • द्वितीय: तमिलनाडु (13) पुरस्कारों के साथ।
  • अन्य प्रमुख: उत्तर प्रदेश (11), पश्चिम बंगाल (11) और केरल (8)
  • न्यूनतम: पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों से एकल प्राप्तकर्ता शामिल हैं।

विश्लेषण

2026 की सूची का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सरकार ने 'लोकतांतिकीकरण' पर जोर दिया है। इसमें केवल प्रसिद्ध फिल्मी सितारों और खिलाड़ियों को जगह मिली है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और वैज्ञानिकों को भी प्राथमिकता दी गई है। मरणोपरांत दिए गए पुरस्कार (जैसे धर्मेंद्र और वीएस अच्युतानंदन) उनके दीर्घकालिक प्रभाव को स्वीकार करते हैं।

आगे की राह

भविष्य में, इन पुरस्कारों की नामांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाएं राजनीति या पहुंच के अभाव में उपेक्षित रहें।

निष्कर्ष

पद्म पुरस्कार भारतीय संस्कृति और मेधा का गौरव हैं। यद्यपि ये संवैधानिक रूप से उपाधियां नहीं हैं, किंतु ये राष्ट्र की कृतज्ञता का सर्वोच्च माध्यम हैं। वर्ष 2026 की सूची समावेशिता और उत्कृष्टता का एक उत्कृष्ट मेल है, जो आने वाली पीढ़ी को देश सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

पद्म विभूषण 2026 विजेता:

क्रम संख्या

नाम

क्षेत्र

राज्य / देश

1

श्री धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत)

कला

महाराष्ट्र

2

श्री के टी थॉमस

सार्वजनिक मामले

केरल

3

सुश्री एन राजम

कला

उत्तर प्रदेश

4

श्री पी नारायणन

साहित्य और शिक्षा

केरल

5

श्री वी एस अच्युतानंदन (मरणोपरांत)

सार्वजनिक मामले

केरल

पद्म भूषण 2026 विजेता:

क्रम संख्या

नाम

क्षेत्र

राज्य / देश

1

सुश्री अलका याग्निक

कला

महाराष्ट्र

2

श्री भगत सिंह कोश्यारी

सार्वजनिक मामले

उत्तराखंड

3

श्री कल्लापट्टी रामासामी पलानीस्वामी

चिकित्सा

तमिलनाडु

4

श्री ममूटी

कला

केरल

5

डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु

चिकित्सा

संयुक्त राज्य अमेरिका

6

श्री पीयूष पांडे (मरणोपरांत)

कला

महाराष्ट्र

7

श्री एस के एम मयिलानंदन

सामाजिक कार्य

तमिलनाडु

8

श्री शतावरधानी आर गणेश

कला

कर्नाटक

9

श्री शिबू सोरेन (मरणोपरांत)

सार्वजनिक मामले

झारखंड

10

श्री उदय कोटक

व्यापार और उद्योग

महाराष्ट्र

11

श्री वी के मल्होत्रा (मरणोपरांत)

सार्वजनिक मामले

दिल्ली

12

श्री वेल्लापल्ली नटेशन

सार्वजनिक मामले

केरल

13

श्री विजय अमृतराज

खेल

संयुक्त राज्य अमेरिका